डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: विज्ञान, सादगी और राष्ट्रसेवा की अमर विरासत को सद्भावना मंच ने किया नमन

खंडवा- भारत रत्न, देश के पूर्व राष्ट्रपति, प्रख्यात वैज्ञानिक एवं 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर खंडवा स्थित सद्भावना मंच कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण किया तथा राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

कार्यक्रम में सद्भावना मंच के सदस्य कमल नागपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम केवल एक महान वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि वे करोड़ों भारतीयों की आशाओं, सपनों और आत्मविश्वास के प्रतीक थे। उन्होंने अपने ज्ञान, परिश्रम और दूरदर्शी नेतृत्व से भारत के रक्षा एवं अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी मिसाइल परियोजनाओं में उनकी निर्णायक भूमिका ने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान किया, जिसके कारण उन्हें पूरे विश्व में 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में डॉ. कलाम ने जिस सादगी, विनम्रता, ईमानदारी और संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह आज भी जनप्रतिनिधियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी उनका जीवन आम नागरिकों के बीच सहज और सरल बना रहा। विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं के साथ उनका संवाद उन्हें 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाता है। उनका विश्वास था कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा बड़े लक्ष्य निर्धारित कर ज्ञान, अनुशासन और नवाचार के साथ आगे बढ़ेंगे।

प्रमोद जैन ने कहा कि डॉ. कलाम का संपूर्ण जीवन यह संदेश देता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प, कठोर परिश्रम और सकारात्मक सोच के बल पर असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उनका जीवन संघर्ष, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम था। उनके विचार आज भी देश के युवाओं को आत्मनिर्भर, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने डॉ. कलाम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा शिक्षा, विज्ञान, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. कलाम का व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा और उनका जीवन राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च उदाहरण है।

कार्यक्रम में संस्थापक प्रमोद जैन, डॉ. जगदीश चौरे, सुरेंद्र गीते, ललित चौरे, ओम पिल्ले, कमल नागपाल, योगेश गुजराती, सुभाष मीणा, डॉ. एम.एम. कुरैशी, नदीम रॉयल, मनीष गुप्ता, राधेश्याम शाक्य, त्रिलोक चौधरी, अर्जुन बुन्देला, कैलाश पटेल सहित सद्भावना मंच के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

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